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कोडरमा बरकाकाना लाइन बना ताजा उदाहरण
रेल परियोजनाएं विकास की रीढ़ मानी जाती हैं। कोडरमा–बरकाकाना दोहरीकरण भी ऐसी ही एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसकी घोषणा के समय विकास और रोजगार की बातें की गई थीं। लेकिन अब स्थिति निराशाजनक नजर आ रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया में देरी विकास की गति रोक देती है। चार महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद टेंडर जारी न होना गंभीर संकेत है। इससे लागत बढ़ने और समय सीमा खिसकने की आशंका रहती है।
झारखंड रेल यूजर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यह परियोजना भी दश-वर्षीय योजना बन सकती है। जनता अब केवल सुनने को तैयार नहीं है। विकास तभी दिखेगा जब काम जमीन पर नजर आए।