jharkhand high court
पुलिस कार्रवाई पर न्यायालय ने फिर उठाए गंभीर सवाल.
झारखंड हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत के मामले को गंभीरता से लिया है।
मैट्रिक छात्र को पुलिस द्वारा हिरासत में रखने का मामला सामने है।
दोपहर एक बजे कोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई।
चतरा एसपी को ऑनलाइन माध्यम से पेश होना पड़ा।
कोर्ट के आदेश पर केस डायरी पढ़कर सुनाई गई।
डायरी में पूछताछ की तारीखों का जिक्र मिला।
अदालत ने बच्चों से पूछताछ के तरीके पर ध्यान दिया।
रात में घर से उठाने पर सवाल खड़े किए गए।
न्यायालय ने संवैधानिक अधिकारों की चर्चा की।
मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका जताई गई।
कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की।
आईओ को पूरी केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया गया।
खंडपीठ ने जांच की निष्पक्षता पर जोर दिया।
डीएसपी और थाना प्रभारियों को राहत भी मिली।
जब्त मोबाइल उन्हें वापस कर दिए गए।
लेकिन सशरीर उपस्थित रहने का आदेश बरकरार रहा।
कोर्ट ने जिम्मेदारी तय करने के संकेत दिए।
पुलिस को कानून के दायरे में रहने की हिदायत दी।
न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया।
मामले को उदाहरणात्मक बताया गया।
छात्र की मां ने न्याय की गुहार लगाई थी।
हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की गई।
आरोप है कि पुलिस ने नियमों की अनदेखी की।
दस दिन तक अवैध हिरासत का दावा किया गया।
पहली सुनवाई में भी कोर्ट नाराज दिखा था।
पुलिस अधिकारियों को कोर्ट रूम में बैठाया गया था।
अधिवक्ताओं ने छात्र के अधिकारों की बात रखी।
सरकार ने प्रक्रिया का हवाला दिया।
कोर्ट अब अंतिम सच्चाई जानना चाहता है।
यह मामला मिसाल बन सकता है।