jharkhand high court
अदालत ने सरकार और एमिकस क्यूरी की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित.
रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी अहम सुनवाई हुई। मामला सरकारी अस्पतालों में बर्न यूनिट उपलब्ध कराने से संबंधित था। जनहित याचिका के माध्यम से यह मुद्दा अदालत में उठाया गया था। सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने की। अदालत ने राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। सरकार ने दावा किया कि सभी जिलों में बर्न यूनिट स्थापित हैं। मेडिकल कॉलेजों में भी आवश्यक सुविधा उपलब्ध बताई गई। अस्पतालों में आधारभूत संरचना तैयार होने की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग का उल्लेख किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।
सरकार ने कहा कि बर्न यूनिट को मजबूत बनाने का काम जारी है। अस्पतालों में संसाधन बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। मरीजों के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं रहने देने का आश्वासन दिया गया। स्वास्थ्य विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है। डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया गया। अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। अदालत ने सरकार के जवाब को रिकॉर्ड में लिया। मामले को जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना गया। सुनवाई के दौरान कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुना।
एमिकस क्यूरी अधिवक्ता दीक्षा द्विवेदी ने अलग चिंताएं रखीं। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी अभी भी चुनौती है। कुछ अस्पतालों में सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई। याचिकाकर्ता ने पूर्ण रूप से बर्न यूनिट चालू करने की मांग की थी। सभी सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को शामिल करने की बात कही गई। अदालत ने सभी सुझावों पर विचार किया। फैसले की घोषणा बाद में की जाएगी। स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। राज्य में बेहतर चिकित्सा सुविधा की अपेक्षा जताई जा रही है। अब सभी की नजर कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी है।