jharkhand high court
तकनीकी रिपोर्ट साझा न होने पर कोर्ट ने फैसला बदला.
झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली चोरी से जुड़े पुराने मामले में अहम फैसला दिया। यह मामला लगभग 25 वर्ष पुराना बताया गया है। खंडपीठ ने एकल पीठ का आदेश रद्द कर दिया। पहले उषा मार्टिन लिमिटेड के पक्ष में फैसला आया था। बिजली विभाग को राशि लौटाने का निर्देश दिया गया था। सात दशमलव पांच प्रतिशत ब्याज भी शामिल था। इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी। अदालत ने अपील पर विस्तार से सुनवाई की। सुनवाई के दौरान प्रक्रिया संबंधी त्रुटि सामने आई। इसके आधार पर आदेश को निरस्त कर दिया गया।
कोर्ट ने पाया कि तकनीकी विशेषज्ञ की रिपोर्ट पर भरोसा किया गया था। लेकिन रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध नहीं कराई गई थी। अदालत ने इसे प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन माना। इसलिए पूर्व आदेश को कानूनी रूप से सही नहीं माना गया। 4 सितंबर 2025 का आदेश रद्द कर दिया गया। साथ ही 2001 का अधिनिर्णायक आदेश भी समाप्त किया गया। अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई की आवश्यकता बताई। नए अधिनिर्णायक की नियुक्ति की गई।
मामला वर्ष 2000 में बिजली चोरी के आरोप से शुरू हुआ था। कंपनी की बिजली आपूर्ति काट दी गई थी। बिजली बोर्ड ने 40.39 करोड़ रुपये का अस्थायी बिल जारी किया था। कंपनी ने अदालत में चुनौती दी थी। बिजली बहाली के लिए पांच करोड़ रुपये जमा कराए गए थे। बैंक गारंटी भी दी गई थी। कंपनी ने बाद में राशि वापसी की मांग की। अब मामले की दोबारा सुनवाई होगी। तीन महीने में फैसला देने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट के इस आदेश को महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय माना जा रहा है।