jharkhand high court
जांच में गवाह नहीं, कर्मचारी को नहीं मिला जिरह अवसर.
झारखंड हाईकोर्ट ने विभागीय जांच की खामियों पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई थी। खंडपीठ ने विभाग की अपील अस्वीकार कर दी। न्यायालय ने कर्मचारी परिवार के अधिकारों को प्राथमिकता दी। फैसले से न्यायिक प्रक्रिया की महत्ता उजागर हुई।
मामला स्व. मनोज प्रसाद से संबंधित था जो झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड में कार्यरत थे। रिश्वत के आरोप के बाद कार्रवाई की गई थी। गिरफ्तारी के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। बिना पूर्ण साक्ष्य के कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। अंततः उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। अपील लंबित रहते उनकी मृत्यु हो गई।
कोर्ट ने कहा कि केवल दस्तावेजों से दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। गवाहों की गवाही आवश्यक होती है। कर्मचारी को बचाव का पूरा अवसर मिलना चाहिए। जांच रिपोर्ट को विधिसम्मत नहीं माना गया। अदालत ने पुनः जांच भेजना उचित नहीं समझा। पत्नी को चार सप्ताह में सभी वित्तीय लाभ देने का आदेश दिया गया।