representation image
नए एसओपी से स्वास्थ्य जोखिम कम करने की उम्मीद, जागरूकता जरूरी
Ranchi : शहरों और गांवों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब सिर्फ प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा खतरा बन चुकी है। झारखंड सरकार द्वारा जारी किए गए नए एसओपी की समय पर आवश्यकता थी। आंकड़े साबित करते हैं कि स्थिति चिंताजनक हो चुकी है, क्योंकि सिर्फ रांची में ही दो वर्षों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लेने वालों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है।
नसबंदी और टीकाकरण जैसे उपाय लंबे समय तक प्रभावी रहेंगे, लेकिन यह तभी संभव है जब प्रशासन के साथ आम लोग भी इसमें सहयोग दें। पालतू कुत्तों का पंजीयन और जिम्मेदारी तय करना सही दिशा में उठाया गया कदम है। इससे लापरवाही कम होगी और कुत्तों के व्यवहार पर नियंत्रित निगरानी बढ़ेगी।
अगले 30 दिनों में कार्ययोजना लागू होने जा रही है। नोडल समिति गठन, इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट और सघन अभियान इसकी सफलता तय करेंगे। यह सिर्फ प्रशासनिक नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी है कि शहर इंसानों और जानवरों के लिए सुरक्षित बने।