jharkhand high court
हाईकोर्ट ने माना, अब संस्थागत ढांचा पर्याप्त
झारखंड में बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन का सफर लंबा रहा है। वर्ष 2012 में हालात बेहद खराब थे। अस्पतालों से निकलने वाला कचरा खुले में फेंका जा रहा था। इससे संक्रमण और प्रदूषण बढ़ रहा था। जनहित याचिका के बाद कोर्ट ने निगरानी शुरू की। धीरे-धीरे व्यवस्था में सुधार हुआ।
कोर्ट ने माना कि अब राज्य में ठोस ढांचा मौजूद है। कई कॉमन ट्रीटमेंट यूनिट चालू हो चुकी हैं। नई यूनिट भी निर्माणाधीन है। नियमों को सख्त किया गया है। जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय की गई है। अब प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
न्यायालय ने कहा कि आगे लगातार निगरानी जरूरी नहीं। नियमों का पालन प्रशासन को करना होगा। उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई होगी। नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। स्वच्छ पर्यावरण को प्राथमिकता दी गई है। यह फैसला भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है।