jharkhand high court
हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता देखते हुए राहत देने से इंकार.
रांची हाईकोर्ट ने कोचांग गैंगरेप मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। दोषी अजूब सांडी पूर्ति की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। आरोपी ने सजा के खिलाफ अपील दायर की थी। अदालत ने मामले के सभी दस्तावेजों की जांच की। सुनवाई न्यायमूर्ति रंजन मुखोपाध्याय की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने गवाहों के बयान पर भरोसा जताया। पीड़िता द्वारा आरोपी की पहचान निर्णायक मानी गई। ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया को सही बताया गया। अदालत ने अपराध की प्रकृति को गंभीर माना। इसलिए जमानत देने से इनकार कर दिया गया।
राज्य सरकार की ओर से मजबूत पैरवी की गई। अधिवक्ता भोला नाथ ओझा ने साक्ष्यों का विवरण रखा। अदालत ने कहा कि आरोपी की भूमिका स्पष्ट है। समाज में गलत संदेश रोकना भी जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया गया। आरोपी को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। इससे मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी। आदेश के बाद कानूनी हलकों में चर्चा शुरू हो गई। फैसला न्यायिक सख्ती का उदाहरण माना जा रहा है।
घटना जून 2018 में खूंटी जिले के कोचांग गांव में हुई थी। पांच महिलाएं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम में शामिल थीं। उसी दौरान उनका अपहरण कर गैंगरेप किया गया। यह घटना पत्थलगड़ी आंदोलन के समय हुई थी। पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया था। निचली अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था। फादर अल्फांसो को साजिशकर्ता बताया गया था। 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अन्य आरोपियों के साथ अजूब सांडी पूर्ति भी शामिल था। हाईकोर्ट का निर्णय सजा को मजबूत आधार देता है।