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रांची और देवघर में निवेश पर उठे सवाल.
Ranchi: JPSC और JSSC परीक्षा घोटाले की जांच के बीच अभय तिवारी की कथित संपत्तियां जांच का अहम विषय बनती जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार अभय तिवारी के पास 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि कथित परीक्षा घोटाले से मिली रकम को जमीन और मकान में लगाया गया। इसके अलावा फ्लैट और कारोबार में निवेश की जानकारी भी सामने आई है। रांची के नामकुम थाना क्षेत्र स्थित जोरा गांव में आलीशान मकान होने की बात कही जा रही है। इस मकान के लिए करोड़ों रुपये की जमीन खरीदे जाने का दावा है। सिंह मोड़ के पास भी करोड़ों रुपये का फ्लैट होने की जानकारी सामने आई है। बरियातू में भी संपत्ति अर्जित करने की बात कही जा रही है। इन संपत्तियों के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की नजर कथित आर्थिक नेटवर्क पर है। संपत्तियों की खरीद और निर्माण में इस्तेमाल रकम का स्रोत जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
देवघर में बन रहे बड़े अस्पताल को भी कथित संपत्ति नेटवर्क की अहम कड़ी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अस्पताल के निर्माण में बड़ी राशि निवेश की जा रही है। अस्पताल के निर्माण में लगी रकम और उसके स्रोत की जांच की जा सकती है। यदि इस निवेश का संबंध परीक्षा घोटाले से जुड़ी रकम से मिलता है तो मामला गंभीर हो सकता है। रांची की एक मेडिकल एजेंसी के पास भी करोड़ों रुपये रखे होने की सूचना सामने आई है। दावा है कि यह रकम अभय तिवारी से जुड़ी हो सकती है। रकम किसके नाम पर रखी गई है और उसका स्रोत क्या है, इसकी जांच जरूरी होगी। एजेंसी और अभय तिवारी के बीच वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में अभय तिवारी ने अपनी संपत्तियों की पूरी जानकारी नहीं दी। इसके बाद CID के सामने उसकी वास्तविक संपत्ति का पता लगाने की चुनौती बढ़ गई है।
जांच एजेंसी अब संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सकती है। जमीन की रजिस्ट्री और खरीद में इस्तेमाल रकम का रिकॉर्ड खंगाला जा सकता है। बैंक खातों से किए गए भुगतान की भी जांच संभव है। एजेंसी यह पता लगा सकती है कि संपत्तियां सीधे अभय तिवारी के नाम पर हैं या किसी अन्य के नाम पर। रिश्तेदारों और कंपनियों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की भी जांच की जा सकती है। जोरा गांव का मकान और सिंह मोड़ का फ्लैट जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बरियातू की कथित संपत्ति को भी आर्थिक जांच से जोड़ा जा सकता है। देवघर के अस्पताल में किए जा रहे निवेश की जानकारी भी जुटाई जा सकती है। हालांकि 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और अन्य निवेश के दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। दस्तावेजों और वित्तीय जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।