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साहिबगंज की 75 शिकायतों पर एक भी एटीआर नहीं.
अवैध खनन, परिवहन और खनिजों के भंडारण को लेकर झारखंड में लगातार शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इन गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके तहत विभिन्न जिलों में शिकायतों की जांच और कार्रवाई की जाती है। लेकिन कार्रवाई के बाद रिपोर्ट भेजने की प्रक्रिया कई मामलों में लंबित है। दो वित्तीय वर्षों के आंकड़ों में यह स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आई है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कुल 859 शिकायतें दर्ज हुईं। विभाग को इनमें केवल 416 मामलों की एक्शन टेकन रिपोर्ट प्राप्त हुई। शेष 443 मामलों की एटीआर अभी तक लंबित है। रिपोर्ट लंबित रहने से कार्रवाई की वास्तविक स्थिति विभागीय स्तर पर स्पष्ट नहीं हो पाती। इससे राजस्व की संभावित क्षति और अवैध कारोबार पर नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ती है।
खनिज निगरानी के लिए माइनिंग इंस्पेक्टर से लेकर उच्च स्तर के अधिकारियों तक जिम्मेदारियां तय हैं। असिस्टेंट माइनिंग ऑफिसर और जिला खनन पदाधिकारी भी मामलों की जांच की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। डिप्टी डायरेक्टर माइंस और क्षेत्रीय पदाधिकारी भी निगरानी तंत्र का हिस्सा हैं। शिकायतों की जांच कर दोष पाए जाने पर कार्रवाई करना संबंधित अधिकारियों का दायित्व है। इसके बाद कार्रवाई की रिपोर्ट विभाग को भेजी जानी चाहिए। धनबाद में सबसे ज्यादा 120 शिकायतें दर्ज होने के बावजूद एटीआर की संख्या कम रही। जिले में 2024-25 के दौरान 87 शिकायतें दर्ज हुई थीं। अगले वित्तीय वर्ष में 33 शिकायतें सामने आईं। कुल मामलों में केवल 26 की कार्रवाई रिपोर्ट विभाग को भेजी गई। इस कारण धनबाद के 94 मामलों की एटीआर अब भी लंबित है।
पाकुड़ में 93 शिकायतों में से 67 मामलों की एटीआर विभाग को मिली है। गिरिडीह में 73 शिकायतों के मुकाबले 29 मामलों की रिपोर्ट प्राप्त हुई। साहिबगंज में दर्ज 75 शिकायतों में किसी भी मामले की एटीआर विभाग तक नहीं पहुंची। रांची में कुल 64 शिकायतों में 31 मामलों की रिपोर्ट मिली है। राजधानी में 33 मामलों की एटीआर अभी लंबित बताई गई है। वहीं रामगढ़, गुमला, खूंटी और सिमडेगा ने शत प्रतिशत एटीआर भेजने का आंकड़ा दर्ज किया है। खनिज परिवहन की निगरानी के लिए कई जिलों में चेकपोस्ट और चेकनाका संचालित हैं। कुछ जिलों ने नए चेकपोस्ट के लिए विभाग से राशि की मांग की है। जिन जिलों में चेकपोस्ट संचालित नहीं हैं, वहां निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत आंकड़ों से सामने आती है।