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अतिक्रमण हटाकर विकास योजनाओं की तैयारी.
रांची नगर निगम ने अपनी जमीनों और परिसंपत्तियों को अतिक्रमणमुक्त कराने के बाद उनके व्यवस्थित उपयोग की तैयारी शुरू कर दी है। पिछले एक साल के दौरान निगम ने कई महत्वपूर्ण भूखंडों से कब्जा हटाने की कार्रवाई की है। कार्रवाई के बाद जमीनों का सीमांकन कर उनकी वास्तविक स्थिति दर्ज की जा रही है। संबंधित संपत्तियों का अभिलेखीकरण भी कराया जा रहा है। निगम ने कई जगहों पर बाउंड्री वॉल बनाकर जमीन की भौतिक सुरक्षा शुरू कर दी है। एदलहातू में करीब 4.8 एकड़ भूमि को कब्जे से मुक्त कराया गया है। कुसुम बिहार में 78.65 डिसमिल और करमटोली तालाब में 51 डिसमिल जमीन पर भी कार्रवाई हुई है। ग्वाला टोली डोरंडा में करीब 1.20 एकड़ जमीन सुरक्षित की गई है। उर्दू स्कूल थड़पखना की 31.5 डिसमिल भूमि को भी अतिक्रमणमुक्त कराया गया है। निगम का कहना है कि इन जमीनों को भविष्य की नागरिक जरूरतों के लिए सुरक्षित रखना प्राथमिकता है।
बड़ा घाघरा की 2.80 एकड़ जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के बाद संरक्षण किया जा रहा है। मानिटोला में करीब 5 एकड़ भूमि पर भी निगम की कार्रवाई हुई है। पिंजरा पोखर-गौशाला चौक में 11 डिसमिल जमीन को सुरक्षित किया गया है। डोरंडा बाजार की करीब 1 एकड़ भूमि को भी निगम ने अपने संरक्षण में लिया है। बूटी मोड़ चौक की 0.44 एकड़ जमीन पर भी संरक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई है। इसके अलावा निगम की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों के आसपास सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है। मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन और मोरहाबादी रजिस्ट्री ऑफिस में बाउंड्री वॉल निर्माण कराया जा रहा है। नागा बाबा खटाल एमआरएफ सेंटर, ट्रेकर स्टैंड एमआरएफ सेंटर और बकरी बाजार स्टोर की जमीन भी सुरक्षित की जा रही है। धुर्वा और जगन्नाथपुर की जमीनों के साथ खादगढ़ा आश्रय गृह की संपत्ति पर भी ध्यान दिया जा रहा है। निगम का लक्ष्य अपनी संपत्तियों को रिकॉर्ड में स्पष्ट करने के साथ उन्हें दोबारा अतिक्रमण से बचाना है।
अतिक्रमणमुक्त जमीनों को उपयोगी बनाने के लिए निगम ने कई योजनाओं पर विचार शुरू किया है। मोरहाबादी, बूटी मोड़ और डोरंडा बाजार में वेंडिंग जोन विकसित करने की योजना प्रस्तावित है। इन स्थानों पर व्यवस्थित तरीके से कारोबार के लिए जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे बाजार और सड़क किनारे लगने वाले अनियोजित ठेलों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। मजदूरों की जरूरत को देखते हुए डोरंडा बाजार और लोआडीह में लेबर चौक भी विकसित किया गया है। आने वाले समय में सुरक्षित जमीनों पर पार्क और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं तैयार की जा सकती हैं। जरूरत के अनुसार आश्रय गृह और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार भी किया जा सकता है। स्वच्छता तथा कचरा प्रबंधन के लिए भी निगम इन जमीनों का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। निगम की स्पष्ट स्वामित्व वाली संपत्तियां आर्थिक संसाधन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। PPP और Municipal Bonds के माध्यम से भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए भी इन परिसंपत्तियों का उपयोग संभव है।