jharkhand high court
रॉयल्टी बकाया होने पर पट्टा समाप्ति को सही ठहराया.
झारखंड हाईकोर्ट ने पत्थर खनन से जुड़े मामले में स्पष्ट रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि नियमों का पालन जरूरी है। याचिकाकर्ता को राहत नहीं दी गई। मामला पलामू जिले के खनन पट्टे से जुड़ा है। पट्टा वर्ष 2014 में दिया गया था। अवधि दस वर्ष की थी। पर्यावरण स्वीकृति भी प्राप्त थी। प्रदूषण बोर्ड की अनुमति भी मौजूद थी। इसके बावजूद रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही माना।
राज्य सरकार ने बताया कि 2016 से 2019 तक रॉयल्टी बकाया रही। जिला खनन पदाधिकारी ने नोटिस जारी किया। भुगतान नहीं होने पर कार्रवाई की गई। उपायुक्त ने पट्टा समाप्त करने की स्वीकृति दी। इसकी सूचना निर्धारित समय पर दी गई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने औपचारिक आदेश न होने की बात कही। राज्य ने नियमों का हवाला दिया। अदालत ने राज्य की दलील मानी। कानून के तहत कार्रवाई सही पाई गई।
खंडपीठ ने कहा कि तथ्य निर्विवाद हैं। रॉयल्टी भुगतान न होना स्वीकार है। ऐसे में प्राकृतिक न्याय का तर्क नहीं चलेगा। खान आयुक्त का आदेश वैध ठहराया गया। याचिका को निराधार माना गया। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। यह फैसला खनन नीति को मजबूत करता है। नियमों की अनदेखी पर राहत नहीं मिलेगी। खनन पट्टाधारकों को सतर्क किया गया है। सरकारी नियम सर्वोच्च बताए गए हैं।