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देर से सही, लेकिन न्याय की मजबूत मिसाल.
संजीव सिंह हत्याकांड में आया फैसला न्याय प्रणाली के लिए अहम है। करीब दस साल बाद कोर्ट ने दोषियों को सजा दी। यह दिखाता है कि कानून देर से सही, चलता जरूर है। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर निर्णय सुनाया। दोषियों को उम्रकैद दी गई है।
मामले में कई आरोपी थे। सभी के खिलाफ समान साक्ष्य नहीं थे। इसी कारण छह आरोपियों को बरी किया गया। कोर्ट ने निष्पक्षता बनाए रखी। अभियोजन ने मजबूत पक्ष रखा।
यह घटना जमीन विवाद से जुड़ी थी। सार्वजनिक स्थान पर हत्या ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। अब फैसले से अपराधियों में डर बढ़ेगा। यह निर्णय भविष्य के मामलों के लिए उदाहरण बनेगा।