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मॉल्ट स्पिरिट परमिट से उद्योग में नई बहस.
राजधानी रांची में शराब उद्योग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा चर्चा में है। मॉल्ट स्पिरिट परमिट को लेकर उत्पादकों और विभाग के बीच मतभेद की स्थिति बन गई है। जानकारी के अनुसार मॉल्ट स्पिरिट का इस्तेमाल भारत निर्मित विदेशी शराब के निर्माण में किया जाता है। हाल के घटनाक्रम में कुछ देशी शराब कंपनियों को भी इसका परमिट दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद उद्योग जगत में कई सवाल उठने लगे हैं। उत्पादकों का कहना है कि उत्पादन मानकों का पालन सभी इकाइयों के लिए समान रूप से होना चाहिए। इस मामले को लेकर विभिन्न कंपनियों में असंतोष की स्थिति बताई जा रही है। उद्योग से जुड़े लोग विभागीय निर्णयों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। मामला अब नीति और प्रक्रिया दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है।
राज्य में देशी शराब निर्माण के लिए एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा फ्लेवर और कैरेमल का इस्तेमाल भी किया जाता है। विदेशी शराब उत्पादन में मॉल्ट स्पिरिट एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। उत्पाद विभाग विदेशी शराब कंपनियों को इसके लिए आवश्यक परमिट जारी करता है। इसी प्रक्रिया के तहत कंपनियां उत्पादन के लिए कच्चा माल खरीदती हैं। दूसरी ओर देशी शराब निर्माण इकाइयों को ईएनए आधारित परमिट प्रदान किए जाते हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया अलग होती है। इसलिए परमिट प्रणाली भी उसी अनुरूप बनाई गई है। वर्तमान विवाद इसी प्रक्रिया से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। इस विषय पर विभिन्न पक्षों के बीच विचार-विमर्श जारी है।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि स्पष्ट नियम और पारदर्शिता किसी भी क्षेत्र के लिए आवश्यक होते हैं। शराब उद्योग में भी यही सिद्धांत लागू होता है। उत्पादकों ने इस मामले में विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि नीति संबंधी निर्णयों का प्रभाव पूरे उद्योग पर पड़ता है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उद्योग जगत इस मामले पर आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और प्रमुखता से उठ सकता है। राज्य में शराब उत्पादन से जुड़ी नीतियों पर भी चर्चा तेज हो सकती है। फिलहाल मामले को लेकर बहस और असंतोष जारी है। संबंधित सभी पक्ष घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।