jharkhand high court
सिग्नल, सीसीटीवी, पार्किंग और भारी वाहनों पर निर्देश.
हजारीबाग शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। जनहित याचिका अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा ने दायर की थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया है। डीसी, एसपी और नगर आयुक्त को आदेशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार किया गया है। नगर निगम को ट्रैफिक लाइट मैनेजमेंट सिस्टम पर तेजी से काम करने को कहा गया है। करीब 2.68 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के तहत चार माह में ट्रायल शुरू करना होगा। ट्रायल 20 प्रमुख चौकों पर करने का निर्देश दिया गया है।
जिला कोर्ट चौक, कोर्रा चौक, बाबूगांव चौक और मटवारी चौक इसके प्रमुख स्थानों में हैं। सेंट कोलंबा कॉलेज मोड़, बरकागांव मोड़, भारत माता चौक और पीटीसी चौक भी शामिल हैं। डीवीसी चौक, जिला मोड़, सर्किट हाउस चौक और इंद्रपुरी चौक पर भी ट्रैफिक सिग्नल लगाने होंगे। झंडा चौक, पुराना बस स्टैंड चौक, नया बस स्टैंड चौक और बंसीलाल चौक को भी सूची में रखा गया है। सरदार चौक, कार्मेल स्कूल चौक, कल्लू चौक और पंच मंदिर चौक भी योजना का हिस्सा हैं। सिग्नल के साथ जेब्रा मार्किंग और वैधानिक साइन बोर्ड लगाना जरूरी होगा। इसके रखरखाव के लिए तीन सदस्यीय मॉनिटरिंग टीम बनाई जाएगी। टीम में नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि रहेगा। सिग्नल के खराब रहने का रोजाना रिकॉर्ड रखा जाएगा। 48 घंटे से अधिक बंद रहने वाले सिग्नल को अगले 48 घंटे में दुरुस्त करना होगा।
अदालत ने 2017 से अब तक लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की यूनिटवार सूची मांगी है। यह सूची दो माह के भीतर दाखिल करनी होगी। इसमें कैमरे की स्थिति, स्टोरेज और एएमसी की जानकारी शामिल होगी। खराब कैमरों को चार माह के भीतर ठीक या बदला जाना है। नए जंक्शन और एएनपीआर कैमरों को पुलिस कंट्रोल रूम से जोड़ने का निर्देश दिया गया है। एसपी को प्रमुख चौकों पर पीक आवर की पुलिस तैनाती का चार्ट भी दाखिल करना होगा। ट्रैफिक कर्मियों को तीन माह में कम से कम तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारी और वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर सुबह 8 से रात 8 बजे तक एक समान नियम लागू होगा। आवश्यक सेवाओं को प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। नगर निगम को अनधिकृत प्रवेश शुल्क लेने से भी रोक दिया गया है। पार्किंग स्थलों का प्रमाणित नक्शा और तस्वीरें तीन माह में दाखिल करनी होंगी।
अदालत ने फुटपाथ, चौक, जेब्रा क्रॉसिंग और सड़क पर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। दोबारा अतिक्रमण करने वालों पर संबंधित नगरपालिका कानून के तहत कार्रवाई होगी। वेंडिंग और नॉन-वेंडिंग जोन का सर्वे चार माह में पूरा किया जाएगा। सदर अस्पताल के आसपास वेंडिंग जोन की संभावना पर भी विचार करना होगा। अस्पतालों, कोर्ट और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास कम से कम 100 मीटर का साइलेंस जोन बनाया जाएगा। पुलिस को प्रेशर हॉर्न और अनधिकृत लाउडस्पीकर के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। बाइपास पर बस टर्मिनल और पुराने बस स्टैंड के स्थानांतरण को लेकर भी चार माह में जानकारी देनी होगी। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए रूटिंग प्लान तैयार करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा है कि प्रशासन को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर लगातार कार्रवाई करनी होगी। मामले की सुनवाई 2021 से चल रही है और अदालत ने पहले भी ट्रैफिक व्यवस्था पर रिपोर्ट मंगाई थी।