jharkhand high court
तीन दशक पुराने मामले में आरोपी को मिली राहत.
झारखंड हाईकोर्ट ने रिश्वत लेने के एक पुराने मामले में समीर कुमार चौधरी की अपील पर फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के दोषसिद्धि के आदेश को बरकरार रखा है। समीर कुमार चौधरी ने अपनी सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ क्रिमिनल अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अपील को मेरिट पर खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि रिश्वत मांगने और लेने का आरोप साक्ष्यों से साबित होता है। मामला पीएफ बकाया भुगतान की प्रक्रिया से संबंधित था। आरोप के अनुसार भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए 300 रुपये की रिश्वत मांगी गयी थी। अभियोजन पक्ष ने रिश्वत मांगने और स्वीकार करने से जुड़े साक्ष्य अदालत के सामने रखे थे। हाईकोर्ट ने इन साक्ष्यों को पर्याप्त माना। इसके बाद दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए अपील खारिज करने का फैसला सुनाया गया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत में हुई। अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों की समीक्षा की। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा है। अदालत के अनुसार आरोपी द्वारा पीएफ बकाया भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप साबित हुआ है। रिश्वत की रकम 300 रुपये बतायी गयी थी। आरोपी पर रिश्वत स्वीकार करने का भी आरोप था। सीबीआई की विशेष अदालत ने इसी आधार पर उसे दोषी ठहराया था। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के निष्कर्ष में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया। इसलिए अपील को मेरिट पर खारिज कर दिया गया। हालांकि अदालत ने सजा के मामले में अलग रुख अपनाया।
हाईकोर्ट ने मामले के लगभग 30 साल पुराने होने को विशेष रूप से ध्यान में रखा। अदालत ने यह भी देखा कि आरोपी पहले ही जेल की सजा भुगत चुका है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने सजा को कम कर दिया। अब उसकी सजा उतनी अवधि तक मानी जायेगी, जितनी अवधि वह पहले ही जेल में रह चुका है। इससे आरोपी को अतिरिक्त जेल की अवधि से राहत मिली है। हालांकि रिश्वत लेने के मामले में उसकी दोषसिद्धि कायम रहेगी। अदालत के आदेश में सजा और दोषसिद्धि के दोनों पहलुओं को अलग-अलग देखा गया। लंबे समय से लंबित मामले में हाईकोर्ट ने सजा में राहत देने का फैसला किया। इस आदेश के साथ समीर कुमार चौधरी की क्रिमिनल अपील का निपटारा कर दिया गया। मामले में हाईकोर्ट का फैसला पुराने रिश्वत प्रकरण में सजा से जुड़ी राहत के तौर पर सामने आया है।