jharkhand high court
दस्तावेज नहीं देने पर अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने चेतावनी.
रांची में हिरासत में युवक की मौत के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। शाईदा खातून और अन्य की अवमानना याचिका पर सुनवाई की गई। अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट के निर्देश पर सीजेएम पलामू से मूल रिकॉर्ड पेश किया गया। यह रिकॉर्ड पांकी थाना कांड संख्या 25/2025 से संबंधित है। सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठे। सरकार की ओर से अधिवक्ता ने समय मांगा। उन्होंने स्वास्थ्य दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का अनुरोध किया। कारण बताया गया कि दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सके हैं। जेल अधीक्षक के रिटायर होने की बात भी कही गई।
कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि बहाने स्वीकार नहीं होंगे। दस्तावेज समय पर क्यों नहीं दिए गए, यह पूछा गया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि 5 मई तक हर हाल में दस्तावेज पेश किए जाएं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई होगी। आईजी प्रिजन और गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। अदालत ने समय सीमा तय कर दी है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब इकबाल और आयुष राज ने पैरवी की। उन्होंने मामले को गंभीर बताया। अदालत ने पारदर्शिता बनाए रखने की जरूरत बताई।
पिछली सुनवाई में मेडिकल रिपोर्ट को लेकर विरोधाभास सामने आया था। एक रिपोर्ट में युवक को फिट फॉर कस्टडी बताया गया था। दूसरी रिपोर्ट में चोट का जिक्र किया गया था। इस अंतर को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई की। प्रार्थी के अनुसार युवक महफूज अहमद को पुलिस ने हिरासत में लिया था। उसके साथ मारपीट का आरोप लगाया गया है। बाद में उसकी मौत हो गई। मामले की जांच जारी है। अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।