jharkhand high court
जमानत याचिका खारिज कर अदालत ने गंभीर आरोपों का किया उल्लेख.
रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी नंदन कुमार उर्फ अभिषेक गुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले के सभी तथ्यों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी एक लोक सेवक है। उसे एसीबी ने 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। अभियोजन स्वीकृति का मामला भी अभी विचाराधीन है। ऐसे में जमानत देने से जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अदालत ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए याचिका खारिज कर दी। इससे आरोपी को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिल सकी। अदालत का आदेश भ्रष्टाचार मामलों में सख्त रुख का संकेत माना जा रहा है।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले में आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है। अधिवक्ता ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने के कारण आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए। एसीबी की ओर से इसका विरोध किया गया। जांच एजेंसी ने बताया कि अभियोजन स्वीकृति के लिए संबंधित विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। यह मामला राज्य सरकार के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव के पास लंबित है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण किया। इसके बाद आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले की प्रकृति गंभीर है। इसलिए जमानत देना उचित नहीं होगा। आदेश के बाद आरोपी न्यायिक हिरासत में ही रहेगा।
जानकारी के अनुसार आरोपी 19 मार्च 2026 से जेल में है। उसके खिलाफ दुमका एसीबी कांड संख्या 02/2026 और विजिलेंस केस संख्या 04/2026 दर्ज है। आरोप है कि उसने मोटरसाइकिल खरीदने के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने विशेष योजना बनाकर कार्रवाई की। ट्रैप के दौरान आरोपी को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। मामले की जांच अभी भी जारी है। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद आरोपी की जमानत फिलहाल संभव नहीं हो सकी। अब मामले की सुनवाई आगे कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।