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खान सचिव ने परिवहन विभाग से कार्रवाई मांगी.
Ranchi: झारखंड में खनिजों की ढुलाई में ओवरलोडिंग को लेकर खान एवं भूतत्व विभाग ने गंभीर चिंता जताई है। विभाग के अनुसार इससे राज्य को हर साल करीब 1500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। यह अनुमान केंद्रीय लोक उपक्रमों की खनिज ढुलाई और JIMMS पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर लगाया गया है। विभाग ने CCL, BCCL, NTPC Mining Ltd, WBPDCL और DVC Tubed Coal Mine के आंकड़े जांचे हैं। 11, 12 और 13 अगस्त के चालानों का विश्लेषण किया गया। इन तीन दिनों में 62,723 चालान पोर्टल पर उपलब्ध थे। इनमें कोयला, लौह अयस्क और पत्थरों की ढुलाई शामिल थी। विभाग ने 40,763 चालानों का विस्तृत अध्ययन किया। जांच में 77,456.255 मीट्रिक टन कोयले की ढुलाई दर्ज हुई। ओवरलोडिंग के मामलों को लेकर खान सचिव ने परिवहन सचिव से आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
आंकड़ों के अनुसार CCL ने तीन दिनों में 56,600.592 मीट्रिक टन कोयले की ढुलाई की। BCCL ने 7,543.963 मीट्रिक टन कोयला भेजा। WBPDCL की ढुलाई 5,760.84 मीट्रिक टन रही। NTPC Mining Ltd ने 2,826.35 मीट्रिक टन कोयले की ढुलाई की। DVC Tubed Coal Mine से 3,072.47 मीट्रिक टन कोयला भेजा गया। विभाग के मुताबिक कुछ ट्रकों में 15 टन से अधिक अतिरिक्त खनिज लादे गए। चालान और ढुलाई के आंकड़ों के मिलान से ओवरलोडिंग की पुष्टि होने की बात कही गई है। Motor Vehicles Act 1988 के तहत ऐसी ढुलाई पर जुर्माने का प्रावधान है। नियम के मुताबिक 20 हजार रुपये के साथ अतिरिक्त वजन पर 2 हजार रुपये प्रति टन का दंड लगाया जा सकता है। विभाग के आकलन में तीन दिनों की ओवरलोडिंग पर करीब 15.49 करोड़ रुपये का दंड बनता है।
खान विभाग ने ओवरलोडिंग को केवल राजस्व का मामला नहीं माना है। विभाग के अनुसार इससे राज्य की आधारभूत संरचना को भी नुकसान पहुंच रहा है। भारी वाहनों की वजह से सड़कें तेजी से खराब हो रही हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। खराब सड़कों के रखरखाव पर सरकार का खर्च बढ़ रहा है। विभाग ने चालान और वाहनों की नियमित जांच का सुझाव दिया है। ओवरलोडिंग करने वाले ट्रांसपोर्टरों की पहचान करने की बात कही गई है। कोयला ढुलाई वाले रास्तों पर विशेष जांच अभियान चलाने का प्रस्ताव है। बिना वाहन रोके वजन लेने की तकनीक और धर्मकांटा के आंकड़ों को जांच से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। खान, परिवहन, पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम बनाने तथा JIMMS को स्वतः ओवरलोडिंग पकड़ने के लिए अपग्रेड करने की सिफारिश की गई है।