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कई राज्यों की शिकायतों से जुड़ा मोबाइल डेटा.
देवघर में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साइबर थाना की टीम ने यह कार्रवाई पथरड्डा ओपी क्षेत्र में की। पुलिस को वहां ऑनलाइन ठगी से जुड़े लोगों के सक्रिय होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद डीएसपी कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में टीम तैयार की गई। 18 सितंबर को पुलिस ने सूचना वाले स्थान पर छापेमारी की। मौके पर मौजूद 10 युवकों को पुलिस ने पकड़ लिया। तलाशी में 15 मोबाइल फोन बरामद किए गए। आरोपियों के पास से 18 सिम कार्ड भी मिले। पुलिस ने एक एटीएम कार्ड भी जब्त किया। बरामद सामान को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी अलग-अलग कंपनियों और सरकारी योजनाओं का नाम इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का निशाना बनाते थे। FLIPKART, AMAZON और कस्टमर केयर के नाम पर लोगों से संपर्क किए जाने की जानकारी मिली है।
गिरफ्तार लोगों में महेश राणा और गौतम राणा शामिल हैं। पाण्डव महतो और शुभम यादव को भी पुलिस ने पकड़ा है। उत्तम राणा, लालमोहन राणा और कैलाश दास के नाम भी आरोपियों की सूची में हैं। कुन्दन कुमार दास, मनवर अंसारी और छलछली कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार सभी आरोपी देवघर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं। जब्त मोबाइल फोन के IMEI नंबर की तकनीकी जांच की गई है। जांच में इन नंबरों से कई राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों का लिंक मिला है। इससे पुलिस को मामले की जांच आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। उत्तम राणा के खिलाफ देवघर साइबर थाने में पहले से मामला दर्ज है। कैलाश दास और कुन्दन कुमार दास के खिलाफ भी पुराने मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस उनसे ठगी में इस्तेमाल किए गए तरीकों और संपर्कों की जानकारी ले रही है। जांच एजेंसी गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में ठगी के कई अलग-अलग तरीके सामने आए हैं। आरोपी फर्जी Google Pay कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों से बात करते थे। PhonePe और Paytm के नाम का इस्तेमाल करके भी ग्राहकों को झांसे में लेने की कोशिश की जाती थी। बातचीत के दौरान कैशबैक मिलने का लालच दिया जाता था। इसके बाद आरोपियों द्वारा लोगों से संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता था। PM किसान योजना को भी ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। आरोपी बिजली बिल और RTO चालान से संबंधित APK फाइल भेजते थे। पुलिस के अनुसार इन फाइलों के जरिए मोबाइल का एक्सेस हासिल करने की कोशिश की जाती थी। फर्जी Airtel Payment Bank अधिकारी बनकर भी लोगों से संपर्क किया जाता था। बैंक खाता बंद होने की बात कहकर ग्राहक को डराया जाता था। इसके बाद खाता दोबारा शुरू कराने के नाम पर उन्हें फंसाने का प्रयास किया जाता था। पुलिस अब जब्त उपकरणों से मिली जानकारी का विश्लेषण कर रही है।